भारत की रणनीतिक ताकत का अहम हिस्सा है अग्नि-4
अग्नि-4 एक मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (Medium-Range Ballistic Missile-MRBM) है, जिसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है। यह लगभग 4,000 किलोमीटर तक लक्ष्य भेद सकती है और परमाणु तथा पारंपरिक दोनों प्रकार के हथियार ले जाने में सक्षम है।
मिसाइल में दो चरणों वाला ठोस ईंधन (Two-Stage Solid Fuel Propulsion) सिस्टम लगाया गया है, जिससे इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और जरूरत पड़ने पर तुरंत लॉन्च किया जा सकता है।
इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका रोड-मोबाइल लॉन्चर है। यानी इसे किसी निश्चित लॉन्च पैड पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होती। सड़क के जरिए अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर लॉन्च किया जा सकता है, जिससे युद्ध की स्थिति में इसकी सुरक्षा और उपयोगिता दोनों बढ़ जाती हैं।
स्वदेशी तकनीक ने बढ़ाई मिसाइल की सटीकता
DRDO के अनुसार अग्नि-4 में कई आधुनिक और पूरी तरह स्वदेशी तकनीकों का उपयोग किया गया है। इसमें कंपोजिट रॉकेट मोटर, डिजिटल कंट्रोल सिस्टम, हाई-परफॉर्मेंस ऑनबोर्ड कंप्यूटर और उन्नत एवियोनिक्स लगाए गए हैं।
मिसाइल में रिंग लेजर जाइरोस्कोप (Ring Laser Gyroscope-RLG), माइक्रो नेविगेशन सिस्टम (MINGS) और आधुनिक इनर्शियल गाइडेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। इनकी मदद से मिसाइल लंबी दूरी तय करने के बाद भी बेहद सटीकता के साथ लक्ष्य पर वार कर सकती है।
इसके री-एंट्री व्हीकल (Re-entry Vehicle) में विशेष हीट शील्ड लगी है, जो पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करते समय 3,000 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान सहने में सक्षम है। इससे मिसाइल अत्यधिक गर्मी के बावजूद सुरक्षित रहती है और लक्ष्य तक पहुंचती है।
कई वर्षों की रिसर्च के बाद तैयार हुई अग्नि-4
DRDO ने वर्ष 2007 में लगभग 5,000 किलोमीटर क्षमता वाली नई मिसाइल परियोजना पर काम शुरू किया था। उस समय इसे अग्नि-II प्राइम (Agni-II Prime) के नाम से विकसित किया जा रहा था।
वर्ष 2011 में हैदराबाद स्थित DRDO की एडवांस्ड सिस्टम्स लेबोरेटरी (ASL) द्वारा विकसित इस मिसाइल को आधिकारिक तौर पर अग्नि-4 नाम दिया गया।
इसका पहला परीक्षण 2010 में किया गया था, लेकिन वह सफल नहीं रहा। इसके बाद मिसाइल में कई तकनीकी सुधार किए गए और लगातार सफल परीक्षण हुए।
वर्ष 2014 में अग्नि-4 का सफल परीक्षण पहली बार रोड-मोबाइल लॉन्चर से किया गया। उस परीक्षण के दौरान मिसाइल लगभग 850 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंची, करीब 4,000 किलोमीटर की दूरी तय की और हिंद महासागर में निर्धारित लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेद दिया।
इसके बाद भी विभिन्न चरणों में कई सफल यूजर ट्रायल किए गए, जिनसे इसकी परिचालन क्षमता प्रमाणित होती रही है।
रक्षा मंत्रालय ने क्या कहा
रक्षा मंत्रालय ने परीक्षण के बाद जारी बयान में कहा कि अग्नि-4 के सभी तकनीकी और परिचालन मानकों की सफलतापूर्वक पुष्टि की गई। यह परीक्षण स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड की निगरानी में हुआ और इसके नतीजों ने मिसाइल की विश्वसनीयता को एक बार फिर साबित किया।
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